कोरोनावायरस के बढ़ते असर की वजह से विश्वभर में करीबन 100 देशों ने पिछले महीने अपनी राष्ट्रीय सीमाओँ की बंद कर दिया है। इससे वैश्विक स्तर पर पर्यटन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। चीन की अर्थव्यवस्था में रिकवरी की थोड़ी उम्मीद तो दिख रही है, लेकिन आगे अभी भी इसमें अनिश्चितता बनी हुई है और इसकी वृद्धि दर 2020 में काफी कम रह सकती है साथ ही लाखों रोजगार पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस साल विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 1 या 2 फीसदी तक रह सकती है जो कि 2019 में 6 फीसदी से ऊपर थी।
हालांकि विश्व बैंक ने पिछले हफ्ते ही यह कहा था कि सबसे बुरी स्थिति में करीबन 14 ट्रिलियन डॉलर की यह अर्थव्यवस्था कोई भी वृद्धि नहीं भी कर सकती है। चीन की यह स्थिति पिछले 44 सालों में सबसे बुरी स्थिति होगी और साथ ही 1990 और 2008-09 की आर्थिक मंदी से भी बुरी स्थिति हो सकती है। यूबीएस और गोल्डमैन सैश ने हाल में चीन की वृद्धि दर इस साल घटाकर 1.5 और 3 फीसदी कर दिया था। मंगलवार को ही चीन के कैबिनेट ने 423 अरब डॉलर से ज्यादा की अतिरिक्त वित्तीय मदद को छोटे व्यवसायों के सपोर्ट के लिए घोषित किया है। इससे 67 मिलियन लोगों को फायदा होने की उम्मीद है।
2020 में 1% घट सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था साल 2020 में एक प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है, जो पिछले पूर्वानुमान 2.5 प्रतिशत से उलट है। इसके अलावा यूएन ने आगाह किया है कि यदि पर्याप्त राजकोषीय प्रतिक्रियाओं के बिना आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों को बढ़ाया जाता है तो यह आगे और भी सिकुड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (DESA) के विश्लेषण में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में खलल डाल रहा है। पिछले एक महीने के दौरान लगभग 100 देशों के राष्ट्रीय सीमाओं को बंद करने के साथ लोगों की आवाजाही और पर्यटन का प्रवाह ठप पड़ गया है।
"इन देशों में लाखों कामगार अपनी नौकरी खोने की पूरी संभावना का सामना कर रहे हैं। सरकारें विचार करने के साथ साथ बड़े प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान कर रहीं हैं ताकि आगे चलकर किसी भी संभावित मंदी वाली अर्थव्यवस्था के दौर में प्रवेश करने से बचा जा सके। सबसे खराब परिस्थिति में, वैश्विक अर्थव्यवस्था साल 2002 में 0.9 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है। इसके साथ ही इस ने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था साल 2009 में आर्थिक मंदी के चलते 1.7 प्रतिशत तक सिकुड़ गई थी।
इसमें कहा गया है कि अगर सरकारें आय सहायता प्रदान करने और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देने में मदद करने में विफल रहते हैं तो सिकुड़न और भी अधिक हो सकता है। विश्व आर्थिक स्थिति और नजरिया 2020 के मुताबिक कोविड-19 के ब्रेकआउट के पहले वैश्विक स्तर के आउटपुट के बारे में अनुमान था कि यह 2020 में 2.5 फीसदी की दर से रहेगा। आर्थिक स्थितियों में तेजी से हो रहे बदलाव की वजह से संयुक्त राष्ट्र डीईएसए के वर्ल्ड इकोनॉमिक अनुमान के मुताबिक वैश्विक वृद्धि के लिए 2020 एक बुरा साल साबित होगा। हालांकि सबसे अच्छी स्थिति में यह हो सकता है कि निजी खपत में धीमी कमी, निवेश और निर्यात तथा सरकारी खर्च में बढ़त से समूह-7 के देशों और चाइना की वैश्विक वृद्धि 2020 में 1.2 फीसदी तक गिर सकती है।
वैश्विक आउटपुट में 0.9% की दर से हो सकती है वृद्धि
सबसे बुरे समय में वैश्विक आउटपुट 0.9 फीसदी की दर से वृद्धि कर सकता है, जो कि साल 2020 में 2.5 फीसदी की दर से बढ़ रहा था। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक प्रभाव की गंभीरता काफी हद तक दो कारकों पर निर्भर करेगी - लोगों की आवाजाही और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंध की अवधि और संकट के लिए राजकोषीय प्रतिक्रियाओं का वास्तविक आकार और प्रभावकारिता। इस समय एक अच्छी तरह से तैयार राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज के जरिए वायरस के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य खर्च को प्राथमिकता दी जा रही है और महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले परिवारों को आय सहायता प्रदान करने से एक गहरी आर्थिक मंदी की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी।
लॉकडाउन से सर्विस सेक्टर बुरी तरह प्रभावित
अनुमान के मुताबिक यूरोप और उत्तरी अमेरिका में लॉकडाउन की वजह से सेवा सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है जिसमें खासकर वे उद्योग जो भौतिक रूप से काम करते हैं जिसमें रिटेल कारोबार, लेजर और हॉस्पिटालिटी, रीक्रिएशन एवं यातायात सेवाओं का समावेश है। इस तरह के उद्योग उपरोक्त अर्थव्यवस्थाओं में एक तिहाई रोजगार प्रदान करते हैं। इस वजह से आनेवाले दिनों में बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ेगी। यूरोपियन यूनियन और संयुक्त राष्ट्र में कंज्यूमर खर्च में तेजी से कमी की वजह से विकासशील देशों से कंज्यूमर गुड्स के आयातों में कमी होगी। विकासशील देश मुख्य रूप से पर्यटन और कमोडिटी के निर्यात पर निर्भर होती हैं। पूरे विश्व में अब तक कोरोना के 9.32 लाख से ज्यादा मामले आए हैं और 42,000 से अधिक मौते हो चुकी हैं।